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जानिए Diamond Crossing के बारे में: चारों दिशाओं से पटरी पर आती है ट्रेनें, फिर भी नहीं होता एक्सीडेंट

अक्सर जब आप कोई ट्रैन से यात्रा करते हैं तो आपको कही न कही रेलवे क्रासिंग जरूर नजर आती होगी। लेकिन क्या भला अपने कभी तस्वीर में दिखाई देने वाली Diamond Crossing को देखा है। तो आइए जानते हैं Diamond Crossing क्या है ? और इस क्रासिंग पर ट्रेनें कैसे गुजरती है?



जब ट्रेनों को अपना रास्ता बदलना होता है तो ये ट्रेंस रेलवे क्रासिंग का उपयोग करके अपना रास्ता बदलती हैं।  रेलवे क्रासिंग, रेलवे स्‍टेशन के नजदीक बनाया जाता है। रेलवे क्रासिंग में रेल की पटरियां एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं इन क्रॉसिंग को ट्रेन के रूट के अनुसार सेट किया जाता है। आइए आज आपको एक विशेष प्रकार की क्रॉसिंग के बारे में बता रहे हैं, जिसे डायमंड क्रॉसिंग कहते है। 


मिलिए दुनिया के सबसे लंबी नाक वाले शख्स से, अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया ये रेकॉर्ड

आपने अभी तक लोगों की सामान्य नाक देखकर उसमे ज्यादा फर्क महसूस नहीं किया होगा। लेकिन यदि किसी व्यक्ति के नाक की लाबाई सामान्य से भी ज्यादा बढ़ जाये और एक रिकॉर्ड बन जाये तो वाकई ये लोगों के बीच में चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसे ही एक शक़्श यॉर्कशायर के थॉमस वेडर्स हुए हैं। सबसे लम्बी नाक का रिकॉर्ड उन्हों ने १८वीं शताब्दी में बनाया था। 



यॉर्कशायर के थॉमस वेडर्स ने सबसे लम्बी नाक का रिकॉर्ड अबसे 300 पहले बनाया था और अभी तक यह अनोखा रिकॉर्ड तीन सौ साल बाद भी उन्ही के नाम है। दुनिया में अजब ग़ज़ब कुछ बेहद पुराने कुछ रेकॉर्ड्स ऐसे भी हैं जिन्हें आज तक कोई नहीं चुनौती दे पाया या तोड़ पाया। थॉमस वेडर्स की नाक की लंबाई 7.5 इंच थी जो की ऊपर दी गयी हैं। उनकी ये वायरल फोटो को देखकर लोगों को यकीन नहीं हो रहा है। कई लोग इस फोटो को एडिटेड और फ़र्ज़ी बता रहे हैं। 


छुट्टी के लिए छात्र ने लिखा ऐसा मजेदार प्रार्थना-पत्र, पढ़कर होंगे लोटपोट

देसी अंदाज में बुंदेलखंडी छात्र ने छुट्टी के लिए लिखा ऐसा मजेदार प्रार्थना-पत्र, पढ़कर होंगे लोटपोट, नहीं रुकेगी आपकी हंसी, सोशल मीडिया पर पोस्ट पढ़ने के बाद लोगों ने बहुत सारी प्रतिक्रियाएं दी। 



हर छात्र के जीवन में स्कूल दिनों में कभी न कभी किसी कारण-वश छुट्टी के लिए प्रार्थना-पत्र लिखने का अवसर जरूर मिलता है, Leave Application या किसी भी प्रकार के एप्लीकेशन लिखने का एक तरीका होता है। इन सब की अनदेखी करते हुए जब एक छात्र को बुखार चढ़ा, तो उसने ऐसा अप्लीकेशन लिख डाला कि पढ़ने वालों की हंसी नहीं रुक पा रही है। 


इस तस्वीर में छुपे 9 इंसानी चेहरों को ढूंढने में छूट जाएँगे आपके पसीने

आईए आज आप से एक ऐसी तस्वीर साझा कर रहे हैं, जिसमे 9 इंसानी चेहरे छुपे हुए हैं। इस तस्वीर का क्रेटर बहुत ही चालाकी से इसे बनाया है। हो सकता है 9 इंसानी छुपे चेहरों को ढूंढने में आपके पसीने छूट जाएँ। 


अधिकतर लोग ऐसी तस्वीर में गुंथे हुए सवालों को हल करने के लिए तर्कशक्ति का सहा लेते हैं। अधिकतर विद्वानों का मानना है कि इस प्रकार के इस तरह के पहेलियों को सुलझाने के लिए व्यक्ति की तर्कशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है।


'रामचरितमानस' के संदर्भ में तुलसी के काव्य का प्रकृति-चित्रण

तुलसी के साहित्य में प्रकृति सौंदर्य | रामचरितमानस में पर्यावरणीय सम्पन्नता | तुलसी के रामचरित मानस में प्रकृति चित्रण | तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस में प्रकृति एवं पर्यावरण

#तुलसी के काव्य का प्रकृति-चित्रण


गोस्वामी तुलसीदास मूलत: भक्त कवि थे। अत: प्रकृति को उन्होंने भक्ति के संदर्भ में ही विशेष तौर पर देखा है ,फिर भी प्रबंध रचना की दृष्टि से गोस्वामी तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' में प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण किया है। ये प्रकृति चित्रण मोटे तौर पर हमें निम्न रूपों में दिखाई देता हैं-

(१) प्रकृति का उद्दीपन स्वरूप

(२) प्रकृति का उपदेशात्मक रूप

(३) आलंकारिक प्रकृति चित्रण

(४) प्रकृति का आलंबन रूप


( १ ) प्रकृति का उद्दीपन स्वरूप

तुलसीदास ने संयोग और वियोग के निरूपण में प्रकृति को माध्यम के रूप में चुना है । अर्थात् प्रकृति के माध्यम से उन्होंने संयोग और वियोग के चित्र उद्घाटित किये है। उदाहरण के तौर पर जनक वाटिका प्रसंग में राम और सीता के मिलन से संयोगात्मक प्रकृति का स्वरूप अत्यंत अनूठा बन पड़ा है। 

जनक वाटिका का प्रकृति वर्णन करते-करते तुलसी सीता के अप्रतिम सौंदर्य की तुलना करने लगते है तो उनकी दृष्टि में प्रकृति भी फीकी नजर आने लगती है। इसी तरह 'रामचरितमानस' में सीता हरण के प्रसंग में राम का विरह रूप तुलसीदास ने प्रकृति के माध्यम से ही निरूपित किया है। एक ओर जहां राम शक्ति और सौंदर्य के प्रतिरूप है वहां तुलसी ने संवेदना के स्तर पर राम को प्रलाभ करते हुए दिखा दिया है। वे पेड़-पौंधे ,पशु -पक्षी सभी से सीता का पता पूछने लगते हैं-

" हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी ।

  तुम्ह देखी सीता मृगनैनी ।।"


आगे चलकर इसी भाव के विस्तार में तुलसी कहते हैं -

" नारी सहित सब खग मृग बंदा

  मानहुं मोरि करत है निंदा । "


कहने की आवश्यकता नहीं कि तुलसी के काव्य में प्रकृति का उद्दीपन रूप सटीक रूप से चित्रित हुआ है ।प्रकृति को भूमिका बना- कर कवि ने पात्रों की मानसिक दशा का भी वर्णन किया है। राजा दशरथ की मानसिक स्थिति का वर्णन करते हुए तुलसीदास कहते हैं-

" पीपर पात सरिस मन डोला ।"


अर्थात् राजा दशरथ का मन पीपल के पत्ते की तरह कांप उठा ।पीपल का पत्ता हवा में जिस तरह कांपता  है वैसे ही राजा दशरथ का मन भी कैकयी के शब्द प्रहारों से कैसे कांप उठता  है इसका यथार्थ वर्णन कवि ने किया है‌। 

प्रकृति को कवि ने कहीं-कहीं सांकेतिक रूप भी प्रदान किया है। खासकर तुलसीदास ने वर्षाऋतु के वर्णन में अपनी विशेष रुचि प्रदर्शित की है। जो वर्षाऋतु संयोगावस्था में आनंद और उल्लास पैदा करती है वहीं वियोगावस्था में हृदय में  कसक पैदा करती है। सीता के वियोग में गरजते हुए बादलों को देखकर राम का मन कसक उठता है-

" घन घमण्ड नभ गरजत घोरा,

   प्रियाहीन डरपत मन मोरा ।"


सांकेतिक भाव यह है कि घन रूपी घमंड  वाले बादल आकाश में गरज रहे हैं, ऐसी स्थिति में अकेली सीता पर क्या गुजर रही होगी यह सोचकर राम का मन भयभीत हो उठता है।

तुलसीदास ने राम और सीता के वियोग निरूपण में प्रकृति का भरपूर प्रयोग किया है प्रकृति के बड़े ही संवेदना पूर्ण चित्र प्रस्तुत किए हैं। इतना होने पर भी हमें यह तो मानना ही पड़ेगा कि प्रकृति का उद्दीपन स्वरूप जो तुलसी की कलम से निरूपित हुआ है वह परंपरागत है । उसमें प्राय: मौलिकता का अभाव है लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कवि ने कहीं भी अतिश्योक्तिपूर्ण या भड़कीले चित्रों का अंकन नहीं किया है। कवि ने सीधी -सच्ची बातों को प्रकृति के सीधे- सादे चित्रों के माध्यम से व्यक्त कर दिया है ।