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UPTET - 2021 Notification Details in Hindi | उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा विवरण 2021

UPTET क्या है?

UPTET का Full Form है  Uttar Pradesh Teacher Eligibility Test जिसे Hindi में "उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा" कहते हैं। 

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड (UPBEB) एक बार पुनः साल 2021 के UPTET परीक्षा का आयोजन करने जा रह है।  UPTET राज्य स्तरीय शिक्षण पात्रता परीक्षा है जिसे उत्तर प्रदेश के स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक (जूनियर) शिक्षकों (कक्षा 6-8) की भर्ती के प्रत्येक वर्ष आयोजन होता है। यूपीटीईटी परीक्षा प्रत्येक वर्ष में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड द्वारा एक बार आयोजित की जाती है।  उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक के लिए शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए UPTET (यूपीटीईटी) आवश्यक न्यूनतम योग्यता माना गया है।

UPTET - 2021 महत्त्वपूर्ण तिथियां- 

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी)

ऑनलाइन पंजीकरण प्रारम्भ - 7 अक्तूबर 2021 

पंजीकरण की अंतिम तिथि - 25 अक्तूबर 2021  

आवेदन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख - 26 अक्तूबर 2021  

ऑनलाइन आवेदन का प्रिंट लेने की अंतिम तिथि - 27 अक्तूबर 2021 



विराम-चिह्न: परिभाषा, अर्थ, प्रकार & उदाहरण | Viram Chinh in Hindi

विराम-चिह्न | Viram Chinh in Hindi 

शब्दों और वाक्यों का परस्पर सम्बन्ध बताने तथा किसी विषय को भिन्न-भिन्न भागों में बाटने और पढ़ने में ठहरने के लिए, लेखों में जिन चिन्हों का उपयोग किया जाता है, उन्हें विराम चिह्न कहते हैं।

विराम चिह्नों का विवेचन अंग्रेजी भाषा के English Grammar से लिया गया  है । हिंदी भाषा में विराम चिह्नों का उपयोग इतना बढ़ गया है कि इसको ग्रहण करने में कोई सोच-विचार हो ही नहीं सकता, कई विराम  चिह्नों के उपयोग में बड़ा मतभेद है, और जिस नियमशीलता से अंग्रेजी में इन चिह्नों का उपयोग होता है, वह हिन्दी में आवश्यक नहीं समझी जाती।


विराम-चिह्न का अर्थ-

विराम-चिहन दो शब्दों से मिलकर बना है "विराम + चिह्न"।  “विराम” का शाब्दिक अर्थ है- रुकना, ठहराव, आराम, विश्राम। और “चिह्न” का अर्थ है- निशान।

इस प्रकार, विराम-चिह्न का अर्थ हुआ- ठहराव अथवा रुकने के लिए प्रयोग किए जाने वाले चिह्न


विराम-चिह्न की परिभाषा-

"भाषा में वक्ता या लेखक द्वारा अपने भावों को लिखते या बोलते समय विरामों को प्रकट करने के लिए जिन चिहनों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें 'विराम-चिह्न' कहते हैं।"

जैसे: रोको मत, जाने दो।  रोको, मत जाने दो।


शब्द शक्ति: परिभाषा, भेद & उदाहरण | Shabd Shakti

शब्द शक्ति | Shabd Shakti Kise Kahte Hain?

किसी भी उक्ति में शब्द और अर्थ दोनों का होना अनिवार्य है। शब्द विहीन और अर्थ हीन उक्ति की कल्पना ही नहीं की जा सकती। शब्द और अर्थ एक दूसरे से मिले -जुले रहते हैं। जैसे-काव्य के लिए सुंदर शब्दों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार उनसे व्यक्त होने वाले सुंदर अर्थ की भी।


'शब्द की शक्ति उसके अंतर्निहित अर्थ को व्यक्त करने का व्यापार है।' कारण जिसके द्वारा कार्य संपादन करता है, उसे 'व्यापार' कहा जाता है।'


जिस प्रकार घड़ा बनाने के लिए 'मिट्टी', 'चाक', 'दण्ड' तथा 'कुम्हार' आदि कारण हैं और चाक का घूमना वह 'व्यापार' हैं, जिससे घड़ा बनता है। इसी तरह अर्थ का बोध कराने में 'शब्द' कारण है और 'अर्थ' का बोध कराने वाले व्यापार - अभिधा ,लक्षणा तथा व्यंजना है। आचार्यों ने इन्हीं को 'शक्ति 'तथा 'वृत्ति' नाम दिया है। आचार्य मम्मट ने 'व्यापार' शब्द का प्रयोग किया है तो आचार्य विश्वनाथ ने 'शक्ति 'का । 


शब्द शक्ति की परिभाषा:-

शब्दों के अर्थों का बोध कराने वाले अर्थव्यापारों को 'शब्द शक्ति' कहते हैं।


प्रसंग के अनुसार शब्द का अर्थ:-

शब्द का अर्थ प्रसंग के अनुसार लिया जाता है। पशुओं के मध्य एक विशेष प्रकार के पशु के लिए' बैल' शब्द का प्रयोग होता है, परंतु किसी मूर्ख और विवेक शून्य व्यक्ति को कोई बात समझाते- समझाते जब ऊबकर और खीजकर कोई यह कह बैठता है कि 'तुम तो निरे बैल' हो, तब बैल का आशय 'मूर्ख 'होता है। 

बहुत दिनों से मूर्ख को 'बैल' कहने की एक रूढि - परंपरा हो गई है। इस प्रकार इस वाक्य में 'बैल' का साधारण तथा प्रचलित अर्थ ( दो सिंग, एक पूंछ, दो कान और चार पैरवाला पशु ) न लेकर दूसरा ही अर्थ- अर्थात् 'अत्यंत मूर्ख' लिया जाएगा। अतः वाक्य में प्रसंग के अनुसार 'बैल' शब्द का अर्थ 'मूर्ख' लिया जाएगा ।


केवल सार्थक शब्दों में ही किसी व्यक्ति, पदार्थ, वस्तु, क्रिया आदि का ज्ञान कराने की शक्ति होती है। ऐसे शब्दों का ठीक अर्थ वाक्य के शब्दों के बीच उसके स्थान और प्रयोग से ही निश्चित होता है। जैसे- 'उल्लू ' शब्द का स्वतंत्र रूप में प्रयोग करने पर उस विशेष प्रकार के पक्षी का बोध करायेगा,  जो रात में ही घोंसले से बाहर निकलता  है ,दिन में नहीं । जैसे- 'उल्लू सूर्य के प्रकाश में भी अंधा रहता है ।'


इस वाक्य में 'उल्लू' का अर्थ 'पक्षी विशेष' ही लिया जायेगा, परंतु किसी व्यक्ति को बार-बार कोई विषय समझाने पर भी समझ में नहीं आता तो क्रुद्ध होकर कह दिया जाता है- "ऐसे  उल्लुओं को तो बृहस्पति  भी नहीं समझा सकते।"

इस वाक्य में 'उल्लू 'का अर्थ पक्षी विशेष नहीं ,परंतु 'अत्यंत मूर्ख ' समझा जाएगा।


शब्द के प्रकार

शब्द मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं-

1. वाचक शब्द

2. लक्षक शब्द

3. व्यंजक शब्द


वाचक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे वाच्यार्थ, लक्षक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे लक्ष्यार्थ, तथा व्यंजक शब्द से जो अर्थ ग्रहण किया जाता है उसे व्यंग्यार्थ कहा जाता है। 


शब्द शक्तियां-

वाचक शब्द लक्षक शब्द व्यंजक शब्द

वाच्यार्थ  लक्ष्यार्थ  व्यंग्यार्थ

अभिधा  लक्षणा   व्यंजना


"वाच्यश्च लक्ष्यश्च व्यंग्यश्चेति" (साहित्य दर्पण)


इस आधार पर तीन प्रकार की शब्द शक्तियां मानी गयी है:-

(1) अभिधा शब्द शक्ति

(2) लक्षणा शब्द शक्ति

(3) व्यंजना शब्द शक्ति


पत्र लेखन & प्रकार - कक्षा 6, 7, 8, 9 & 10 हेतु | Patra Lekhan / Letter Writing in Hindi

पत्र लेखन | Patra Lekhan / Letter Writing in Hindi


पत्र लेखन क्या है? 

पत्र-लेखन एक माध्यम है जिसके द्वारा हम दूर बैठे अपने मित्रों, निकट सम्बन्धियों या किसी अन्य व्यक्ति आदि से अपने विचार प्रकट कर सम्पर्क स्थापित किया जा सकता है। 

पत्र-लेखन एक कला माना गया है। 

मित्रों, निकट सम्बन्धियों या किसी अन्य परिचित व्यक्ति को लिखे जाने वाले पत्र-लेखन में मन के भावों और विचारों को निसंकोच अभिव्यक्त किया जाता है। 


पत्र लेखन में निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए- 

१. पत्र की भाषा सरल पत्र लिखने समय निम्नलिखित बातों और शिष्ट होनी चाहिए। 

२. एक ही बात को बार-बार नहीं दोहराना चाहिए। 

३. प्रत्येक बात एक-दूसरे से सम्बन्धित होनी चाहिए। 

४. लेखनी शुद्ध और साफ होनी चाहिए। 


पत्र लेखन के प्रकार -

मुख्यतः पत्र निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

१. औपचारिक पत्र (formal letter)

२. अनौपचारिक पत्र (Informal letter)


१. औपचारिक पत्र (formal letter)

औपचारिक पत्र भी निम्नलिखित 3 प्रकार के होते हैं-

१) सामाजिक पत्र

२) व्यापारिक अथवा व्यवसायिक पत्र

३) सरकारी कार्यालयों के लिए पत्र


निबन्ध-रचना | निबन्ध की परिभाषा, प्रकार, अंग & विशेषताएं | Nibandh in Hindi

निबन्ध | Nibandh in Hindi

निबन्ध-रचना-

आज हम यह इस पोस्ट में निबन्ध-रचना के बारे में पढ़ेंगे। इस पेज पर निबन्ध विषय में, किसी विषय पर एक उत्तम निबन्ध कैसे लिखें? को समझने का प्रयास करेंगे। इसके अतिरिक्त निबन्ध किसे कहते हैं? निबन्ध का अर्थ क्या है? निबन्ध की परिभाषा, प्रकार एवं अंग आदि के बारे में भी सीखेंगे। 


निबन्ध का अर्थ-

निबंध शब्द दो शब्दों ‘नि'+'बंध’ से बना है, जिसका अर्थ है बेहतर ढंग से बँधा हुआ।


निबन्ध में अच्छी भाषा ही निबंध की शक्ति होती है। निबन्ध की भाषा सदैव विषय के अनुकूल होनी चाहिए। एक अच्छे निबंधकार में सदैव अपने भावों, विचारों तथा अनुभवों को प्रभावशाली दंग से व्यक्त करने की कला पायो जाती है।


अर्थात-

"थोड़े किन्तु चुने हुए शब्दों में किसी विषय पर अपने अच्छी तरह से विचार प्रकट करने के प्रयत्न को निबन्ध कहते हैं।"