Friday, 18 January 2019

अकबर के नवरत्न (Nine Gems of Akbar) - Akbar Ke Nav Ratan

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आप सभी लोग बचपन से ही अकबर और बीरबल की कहानियां सुनते आ रहे हैं आज जब अकबर का नाम जुबां पर आता है तो अकबर के नाम के साथ साथ अकबर के नवरत्न को हर कोई याद करता है, अकबर के दरबार में 9 मुख्य दरबारी थे जिन्हें अकबर के नवरत्न से भी जाना जाता है आइये, जानते हैं अकबर के नवरत्न के बारे में-

अकबर के नवरत्न (Nine Gems of Akbar) - Akbar Ke Nav Ratan

अकबर के नवरत्न- Akbar Ke Nav Ratana  (Nine Gems of Akbar) 
(1) . बीरबल -
 बीरबल का जन्म कालपी में 1528 . में ब्राह्मण वंश में हुआ था   बीरबल अकबर के सलाहकार थे। ये अत्याधिक बुद्धिमान और सभी नवरत्नों में सर्वाधिक प्रसिद्ध थे , इनके बचपन का नाम 'महेशदास' था बीरबल अकबर के बहुत ही नज़दीक और पसंदीदा नवरत्न थे। एकमात्र हिंदू राजा थे जिन्होंने दीन--इलाही धर्म को स्वीकार किया था। इन्हें 1583 . में बीरबल को न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी नियुक्त किया गया। 1586 . में युसुफ़जइयों के विद्रोह को दबाने इनकी मृत्यु हो गई। अकबर ने बीरबल को राजा की उपाधि दी।

(2) . टोडरमल -
इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में क्षत्रिय परिवार में हुआ था उन्होंने अपना कार्यकाल शेरशाह सूरी के समय में प्रारंभ किया था और  राजा टोडरमल को अकबर के शासनकाल में वित्त मंत्री बनाया गया राजा टोडरमल ने विश्व की प्रथम भूमि लेखा जोखा एवं मापन प्रणाली तैयार की थी। इनको 1572 . में उसे गुजरात का दीवान बनाया गया तथा बाद में 1582 . में वह प्रधानमंत्री बने। राजा टोडरमल ने एक सैनिक एवं सेना नायक के रूप में विशिष्ट कार्य किया। राजा टोडरमल ने की जलालुद्दीन को अकबर  की उपाधि दी और सन 1589 . में टोडरमल की मृत्यु हो गई।
(3) . अबुल फ़ज़ल -
 अबुल फ़ज़ल का जन्म 1550 . में हुआ था और इनके पिता का नाम सूफ़ी शेख़ मुबारक था। यह अकबर के मुख्य सलाहकार सचिव थे, अबुलफज़ल को अकबर के प्रसिद्ध लेखक के रूप में याद किया जाता है अबुल फजल ने ही प्रसिद्ध पुस्तक अकबरनामा  और आइना--अकबरी की भी रचना की थी। इन्होंने ने मुग़लकालीन शिक्षा एवं साहित्य में अपना बहुमूल्य योगदान दिया। विष्णु शर्मा की पुस्तक पंचतंत्र का फारसी अनुवाद अबुल फजल नहीं किया। 1602 में अबुल फ़ज़ल की जहांगीर के  इशारे बुंदेल ने हत्या कर दी।      
(4) . तानसेन-
 संगीतज्ञ तानसेन का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में हुआ था। इनके बचपन का नाम तनु पांडे था इन्हें संगीत मैं अत्यधिक प्रेम होने के कारण अकबर ने उसे अपने नौ रत्नों में शामिल किया था तानसेन एक बेहतरीन संगीतज्ञ के साथ-साथ वह एक अच्छे कवि भी थे।  उसने कई रागों का निर्माण किया था। ध्रुपद शैली -मियां की टोड़ी, मियां की मल्हार, मियां की सारंग, दरबारी कान्हड़ा आदि इन्हें की देन है।
(5) . मानसिंह -
- राजा मान सिंह जयपुर (आम्बेर) के कच्छवाहा राजपूत कुल में हुआ था राजा मानसिंह अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे। इनकी बहन मान भाई का विवाह जहांगीर से हुआ था और मानसिंह से सम्बन्ध होने के कारण अकबर ने हिन्दुओं के लिए जज़िया कर को समाप्त कर दिया। राजा मानसिंह ने काबुल, बिहार, बंगाल आदि प्रदेशों पर सफल सैनिक अभियान चलाया।

(6) . अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना -
 अब्दुल रहीम खान--खाना अकबर के संरक्षक बैरम खान के बेटे थे। इन्होंने बाबरनामा को तुर्की भाषा मे लिखी जिसे बाद में अबुल फजल ने  बाबरनामा को फ़ारसी भाषा में अनुवाद किया था। यह जहांगीर के गुरु थे अब्दुल रहीम को गुजरात जीतने के बाद अकबर ने ख़ानख़ाना की उपाधि दी।
(7) . मुल्ला दो प्याज़ा -
- हुमायूँ के शासनकाल में अरब से भारत आए थे। इनका मूल नाम अब्दुल हसन था और वह  अपना अधिकतर समय किताबें किताबों पर ही व्यतीत करते थे. और अकबर मुल्ला दो प्याज़ा से प्रभावित होकर शाही पुस्तकालय का प्रभारी बना दिया और बाद में उन्हें शाही दरबार में अकबर के सलाहकार बने। अकबर ने इन्हें दो प्याज़ा की उपाधि प्रदान दी।
(8) . हक़ीम हुमाम -
हक़ीम हुमाम अकबर सलाहकार थे।यह खत (लिपि) पहिचानने में और कविता समझने में अत्यंत माहिर थे। यह बहुत ही आचारवान, उदार, मीठी वाणी तथा मिलनसार में विश्वास रखते थे। अकबर उनका बहुत सम्मान करते थे। अकबर के रसोईघर में इनको प्रधान पद प्राप्त था ।
(9) . फैजी -
इनका जन्म 1547 में हुआ था यह अबुल फ़ज़ल का भाई था और यह फ़ारसी भाषा में कविताओं की रचना करते थे। अकबर ने इन्हें अपने बेटे के लिए गणित के शिक्षक के रूप में नियुक्त किया था । इनकी मृत्यु 1595 में हुई।






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