उपसर्ग और प्रत्यय - परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Upsarg aur Pratyay

उपसर्ग और प्रत्यय - परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Upsarg aur Pratyay

    उपसर्ग और प्रत्यय - परिभाषा, भेद एवं उदाहरण | Upsarg aur Pratyay | उपसर्ग (Upsarg), उपसर्ग की परिभाषा, उपसर्ग के प्रकार (भेद), उपसर्ग के उदाहरण, उपसर्ग के भेद -१)संस्कृत उपसर्ग, २)हिंदी उपसर्ग, ३) अरबी-फ़ारसी उपसर्ग, ४) अंग्रेजी उपसर्ग, प्रत्यय (Pratyay), प्रत्यय की परिभाषा, प्रत्यय के भेद (प्रकार)- १) कृत् प्रत्यय, २) तद्धित प्रत्यय, प्रत्यय के उदाहरण | Upsarg aur Pratyay ki pribhasha, Upsarg aur Pratyay ke Prakar (Bhed), Upsarg ki pribhasha , Pratyay ki pribhasha , Upsarg aur Pratyay ke Udahran.


    उपसर्ग (Upsarg)

    उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना है- उप + सर्ग, उप का अर्थ होता है 'निकट या समीप' तथा सर्ग का अर्थ होता है 'रचना करना', इस प्रकार "उपसर्ग = समीप आकर एक नए शब्द का निर्माण करना" अर्थात "उपसर्ग किसी शब्द के शुरुआत में लगकर नए शब्द का निर्माण करता है। किसी भी शब्द में उपसर्ग जुड़ने के बाद उसका अर्थ परिवर्तित हो जाता है।"    

    उपसर्ग की परिभाषा-

    उपसर्ग की पहली परिभाषा- "किसी शब्द के वे शब्दांश या अवयव जो उस शब्द में आगे की ओर (आरम्भ में) से जुड़कर उसका एक विशेष अर्थ प्रकट करें, तो इन्हे ही उपसर्ग कहा जाता है।" 

    अथवा 

    "उपसर्ग की दूसरी परिभाषा- जो शब्दांश मूल शब्दों से पहले जोड़कर उसके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं अथवा उसे परिवर्तित कर देते हैं उन्हें उपसर्ग कहते हैं। उदाहरण अनु, प्र, अप, नि इत्यादि।"


    उपसर्ग की दोनों ही परिभाषाएं बहुत ही सरल हैं। यहाँ आप उपसर्ग की किसी भी परिभाषा को याद रख सकते हैं। उपसर्ग की दोनों परिभाषाओं से उपसर्ग के बारे में पूर्ण जानकरी प्राप्त होती है। 


    उपसर्ग के उदाहरण-

    प्र + हार = प्रहार

    वि +हार =विहार

    उप + हार = उपहार

    परि + हार= परिहार


    उपसर्ग के प्रकार 

    उपसर्ग निम्नलिखित ४ प्रकार के होते हैं -

    १) संस्कृत उपसर्ग - 

    संस्कृत उपसर्ग को तत्सम शब्दों के साथ जुड़ते हैं। संस्कृत के लगभग 22 मूल उपसर्ग है। 

    यहाँ संस्कृत के उपसर्ग, अर्थ तथा संस्कृत उपसर्ग से बनने वाले शब्द दिए जा रहे हैं-


    1. 'अति' 

    अर्थ- ज़्यादा या अधिक।

    'अति' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अत्यावश्यक, अतिशय, अतिक्रमण, अतिथि, अत्यधिक, अत्याचार, अतिशीघ्र, अत्यंत,।


    2. 'अधि' 

    अर्थ- प्रधान या श्रेष्ठ। 

    'अधि' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अध्यक्ष, अध्यापक, अधिकार, अधिनियम, अधिकृत, अधिराज, अधिग्रहण, अधिगम, अधिपति, अधिवक्ता,  अधिनायक।


    3. 'अनु' 

    अर्थ- बाद में या पीछे। 

    'अनु' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अनुभव, अनुमान, अनुज, अनुदान, अनुवाद, अनुकूल, अनुप्रवाह, अनुपात, अनुक्रमांक, अनुराग, अनुसार, अनुचित।


    4. 'आ'  

    अर्थ- ओर, से या तक।

    'आ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- आज, आगमन, आघात, आकार, आरक्षण, आपार, आजीवन, आहार, आदान, आयात, आवास, आचरण, आकलन, आकाल, आहार, आरोही, आरोग्य।


    5. 'अभि' - 

    अर्थ- सामने या पास

    'अभि' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अभिज्ञान, अभियान, अभ्यास, अभिशाप, अभिलाषा, अभिमान, अभिप्राय, अभियुक्त, अभिभाषण, अभिवादन, अभिनव, अभिनय, अभिभावक।


    6. 'अ - 

    अर्थ- विपरीत, नहीं या आभाव 

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अटल, अमान्य, अस्वीकरण, अचल, अमर, अन्याय, अज्ञान, अनिद्रा, असंतुष्ट, अविश्वास, अधर्म, अहिंसा। 


    7. 'उप' - 

    अर्थ- सहायक, गौण, निकट, छोटा  

    'उप' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- उपवास, उपयुक्त, उपहार, उपचार, उपयोग, उपसंहार, उपग्रह, उपदेश, उपस्थिति, उपस्थित, उपसौर। 


    8. 'प्रति' - 

    अर्थ- प्रत्येक  

    'प्रति' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- प्रतिवर्ष, प्रतिकूल, प्रतिघात, प्रतिशोध, प्रतिनिधि, प्रतिरूप


    9. 'अव - 

    अर्थ- हीन या बुरा 

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अवशेष, अवगुण, अवसाद, अवकाश, अवतरण, अवगत, अवस्था


    10. 'निर' - 

    अर्थ- रहित या बिना 

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- निरक्षर, निर्वाह, निर्धन, निर्जीव, निर्मूल, निर्बल, निर्मल, निर्माण, निर्यात, निर्दोष, 


    11. 'निस' - 

    अर्थ- बिना 

    'निस' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- निष्फल, निश्चय, निष्ठुर, निश्छल, निष्कर्ष, निष्कर्म, 


    12. 'प्र' - 

    अर्थ- अधिक

    'प्र' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- प्रमाण , प्रयोग, प्रकाश, प्रताप, प्रहार, प्रबल, प्रचार, प्रभात, प्रदाह, प्रसार, प्रकट, प्रवाह


    13. 'सह- 

    अर्थ- साथ 

    'सह' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- सहयोग, सहकारी, सहपाठी, सहयोगी, सहमत


    14. 'वि' - 

    अर्थ- विशेष, विशिष्ट या आभाव 

    'वि' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- विमान, विचार, विनाश, विकार, विज्ञान, विराम, विजय, विभाग, विराम, विघटन,  


    15. 'सु' - 

    अर्थ- अच्छा 

    'सु' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- सुरेश, सुमन, सुशील, सुशोभित, सुलभ, सुकुमार, सुहागिन, सुगन्ध,


    16. 'सम' - 

    अर्थ- उत्तम या अच्छा

    'सम' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- सम्मान, संस्कार, संगठन, संचालन, सम्मेलन, संरक्षा


    17. 'दुर' - 

    अर्थ- कठिन, गलत, दुष्ट या बुरा

    'दुर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- दुर्जन, दुर्गन्ध, दुर्दशा, दुरुपयोग, दुराचा, दुर्घटना,


    18. 'दुस' - 

    अर्थ- बुरा या कठिन 

    'दुर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- दुश्शासन, दुष्कर, दुश्चिन्त, दुस्साहस


    19. 'परि' - 

    अर्थ- चारों ओर या आसपास

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- परिमाण, परिणाम, परिवहन, परिक्रमा, परिक्रिया, परिश्रम, पर्याप्त, पर्यावरण, पर्यटन,


    20. 'परा' - 

    अर्थ- विपरीत या उल्टा

    'परा' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- पराजय, पराग , प्राण, पराक्रम, परामर्श, परावर्तन,


    21. 'उत' - 

    अर्थ- श्रेष्ठ

    'उत' उपसर्ग से बनने वाले शब्द-  उत्साह, उत्पाद , उत्पत्ति, उत्थान, उत्कृष्ट


    22. 'अप' - 

    अर्थ- बुरा

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अपहरण, अपशब्द, अपमान, अपवाद, 



    २) हिंदी उपसर्ग- 

    हिंदी के उपसर्ग तद्भव शब्दों के साथ जुड़ते हैं। हिंदी के लगभग 12 मूल उपसर्ग है। 

    यहाँ हिंदी के उपसर्ग, अर्थ तथा हिंदी उपसर्ग से बनने वाले शब्द दिए जा रहे हैं-


    1. 'कु' - 

    अर्थ- बुरा 

    'कु' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- कुकर्म, कुपुत्र, कुपात्र, कुख्यात, कुरुप।


    2. 'अ' - 

    अर्थ- अभाव

    'अ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अमर, अजय,असहज, अचेत।


    3. 'अध' - 

    अर्थ- आधा

    'अध' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अधमरा, अधपका, अधगला, अधजला।


    4. 'औ' - 

    अर्थ- हीन, अब, निषेध

    'औ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- औगुन, औरत, औसर, औघट।


    5. 'दु' - 

    अर्थ-  बुरा, हीन

    'दु' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- दुलारा, दुर्बल, दुबला, दुनिया, दुगुना, दुधारू, ।


    6. 'ति' - 

    अर्थ- तीन

    'ति ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- तिरंगा, तिनका ,  तिराहा, तिर्यक, तिमाही, 


    7. 'चौ - 

    अर्थ- चार

    'चौ उपसर्ग से बनने वाले शब्द- चौराहा, चौकन्ना, चौमासा, चौपाल, चौपाया, चौतरफा, चौकसी, चौकोर


    8. 'पच'- 

    अर्थ- पाँच

    'पच' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- पचरंगा, पचवटी, पचमेल, पचवाला , 


    9. 'उन - 

    अर्थ- एक कम

    'उन' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- उन्नीस, उनतीस, उनचास, उनसठ, उनहत्तर


    10. 'पर' - 

    अर्थ- दूसरा

    'पर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- परदेश, परदेसी, परजीवी, पराधीन, परलोक, परोपकार


    11. 'भर' - 

    अर्थ- पूरा

    'भर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- भरसक, भरपेट, भरमार, भरपूर


    12. 'नि' - 

    अर्थ- रहित

    'नि' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- निक्कमा, निरूपक, निहत्था, नियत, निडर, निहाल,


     

    ३) अरबी - फारसी उपसर्ग - 

    यह उपसर्ग उर्दू शब्दों के साथ जुड़ते हैं। अरबी - फारसी के लगभग 11 मूल उपसर्ग है। 

    यहाँ अरबी - फारसी के उपसर्ग, अर्थ तथा अरबी - फारसी उपसर्ग से बनने वाले शब्द दिए जा रहे हैं-


    1. 'अल' - 

    अर्थ-निश्र्चित, के बाद 

    'अल' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- अलबत्ता, अलग, अलविदा, अलफज्र, अलबैक ।


    2. 'बद' - 

    अर्थ- बुरा 

    'बद' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- बदलाव, बदमिजाज़, बदनाम, बदकिस्मती, बदनीयती, बदबख्ती, बदनसीब, बदबख्त।


    3. 'ला' - 

    अर्थ- बिना

    'ला' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- लावारिस, लापरवाह, लाजवाब, लायक, 


    4. 'सर' -

    अर्थ- मुख्य

    'सर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- सरपंच, सरकार, सरहद, सरताज।


    5. 'दर' - 

    अर्थ- बीच में

    'दर' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- दरमियान, दरहकीकत, दरकिनार, दरअसल।


    6. 'कम' - 

    अर्थ- थोड़ा

    'कम' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- कमउम्र, कमसिन, कमदिमाग, कमअक्ल, कमसमझ, कम्बख्त 


    7. 'ऐन' - 

    अर्थ-ठीक

    'ऐन' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- ऐनजगह, ऐनमौका, ऐनवक्त, 


    8. 'बे' - 

    अर्थ- बिना

    'बे' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- बेहिसाब, बेपरवाह, बेरहम, बेईमान, बेशर्म, बेफिक्र, बेवजह, बेमिसाल,बेइंतहा, बेइज्जज, बेइज्जती, बेकारी, बेनयाज़, बेबाक


    9. 'हम' - 

    अर्थ- बराबर

    'हम' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- हमशक्ल, हमसफ़र, हमराज, हमदर्द, हमजोली, हमनाम


    10. 'बा'- 

    अर्थ- सहित

    'बा' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- बाइज्जत, बाकायदा, बामुश्किल, बाकायदा, बाइबादत, बावजूद, बाइन्साफ़। 


    11. 'ना' - 

    अर्थ- अभाव

    'ना' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- नाकाम, नालायक, नाराज, नासमझ, नाबालिग, नाचीज, नामर्द, नापसंद, नामुमकिन, नामुराद, नामंजूर नाकामयाब, नायाब, नापाक, 



    ४) अंग्रेजी उपसर्ग - 

    अंग्रेजी उपसर्ग अंग्रेजी शब्दों के साथ जुड़ते हैं। अंग्रेजी के लगभग 7 मूल उपसर्ग है। 

    यहाँ अंग्रेजी के उपसर्ग, अर्थ तथा अंग्रेजी उपसर्ग से बनने वाले शब्द दिए जा रहे हैं-


    1. 'सब' - 

    अर्थ'- अधीन

    'सब' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- सब इंस्पेक्टर, सब कमेटी।


    2. 'वाइस' - 

    अर्थ- सहायक

    'वाइस' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- वाइस प्रिंसिपल, वाइस चांसलर। 


    3. 'डिप्टी' - 

    अर्थ- सहायक 

    'डिप्टी' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- डिप्टी कमिश्नर, डिप्टी मैनेजर। 


    4. 'एक्स' - 

    अर्थ- मुक्त

    'एक्स' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- एक्स वाईफ, एक्स प्रेजिडेंट, एक्स प्रिसिपल, एक्स मिनिस्टर, एक्स सर्विसमैन।


    5. 'हैड' - 

    अर्थ- मुख्य

    'हैड' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- हैड मास्टर, हैड ऑफिसर। 


    6. 'चीफ' - 

    अर्थ- प्रमुख

    'चीफ' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- चीफ मिनिस्टर, चीफ इंजीनियर।


    7. 'जनरल' - 

    अर्थ- प्रधान

    'जनरल' उपसर्ग से बनने वाले शब्द- जनरल मैनेजर, जनरल नॉलेज, जनरल सेक्रेटरी  


    प्रत्यय (Pratyay)

    प्रत्यय, दो शब्दों से मिलकर बना है, प्रत्यय  =  प्रति + अय, 'प्रति' का अर्थ है- की ओर / के बाद, तथा 'अय' का अर्थ है- चलने या आने वाला, अर्थात वे एक या एक से अधिक शब्दाँश, जो मूल शब्द के आगे या पीछे जुड़कर नए शाद का निर्माण करते हैं, प्रत्यय कहलाते है। 

    जैसे -  

    अक्ल +मंद = अक्लमंद 

    कीर्ति + मान = कीर्तिमान 

    सब्जी + वाला = सब्जीवाला 

    फेरी + वाला = फेरीवाला 

    नौकर + आनी = नौकरानी 

    बहु + रानी = बहुरानी 


    प्रत्यय की परिभाषा- 

    वे एक या एक से अधिक शब्दाँश, जो दुसरे मूल शब्द के बाद (अर्थात- शब्द के अंत में) लगकर के अंत में उनका अर्थ परिवर्तित कर देते हैं, तो  ये प्रत्यय कहलाते हैं।

    नोट- 

    1. मूल शब्द में लगने वाले शब्दाँश का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता है। 

    2. प्रत्यय लगाने के बाद बनने वाले शब्द के अर्थ में परिवर्तन हो भी सकता है और नहीं भी।


    प्रत्यय के भेद / प्रत्यय के प्रकार -

    हिंदी में प्रत्यय के 2 प्रकार (भेद) होते हैं-

    १) कृत् प्रत्यय - 

    जो प्रत्यय धातु या क्रिया के अंत में जुड़कर नए शब्द की रचना करते है तो ऐसे प्रत्यय, कृत प्रत्यय कहलाते हैं। इनके मेल से बने शब्दों को कृदंत भी कहा जाता है। अतः इन्हे कृदंत भी कहते हैं। 

    उदाहरण- 

    पढ़ना + वाला = पढ़नेवाला

    मिल + आवट = मिलावट 

    बन  +  आवट = बनावट 

    दिख + आवट = दिखावट 

    लड़ना + आई = लड़ाई।

    कृत प्रत्यय से बने शब्द को 'कृदंत' कहलाते हैं। 


    कृत प्रत्यय के भेद (प्रकार) -

    कृत प्रत्यय के पांच भेद होते हैं -

    1. कर्त्तुवाचक कृदंत प्रत्यय

    कर्त्तुवाचक कृदंत प्रत्यय से बने शब्द 'कर्त्ता' का ज्ञान कराते हैं। कर्ता वह होता है जो कार्य को करने वाला होता है।

    जैसे - 

    लूट + एरा = लूटेरा।

    बस + एरा = बसेरा।

    लेख + अक = लेखक 

    पाठ + अक = पाठक  


    कर्त्तुवाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ और उदाहरण-

    इया - डाकिया, धुनिया, बनिया     

    अक - लेखक, नायक, धावक,  गायक, पाठक

    वाला - पढ़नेवाला, सोनेवाला 

    अक्कड - भुलक्कड, घुमक्कड़, पियक्कड़

    आक - तैराक

    आलू - झगड़ालू

    आकू - पढ़ाकू, लड़ाकू

    आड़ी - खिलाडी, अनाड़ी


    2. कर्मवाचक कृदंत प्रत्यय

    कर्मवाचक कृदंत प्रत्यय से बने शब्द 'कर्म' का ज्ञान कराते हैं। कर्म वह होता है जो जिस पर कर्ता द्वारा कार्य किया जाता है।

    जैसे-

    खिल + औना  = खिलौना

    छल + नी  = छलनी

    मथ + नी= मथनी 


    कर्मवाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ और उदाहरण-

    औना - बिछौना , खिलौना

    नी - कतरनी, सुँघनी, चटनी 

    गा - गाना।


    3. करणवाचक कृदंत प्रत्यय

    करणवाचक कृदंत प्रत्यय से बने शब्द क्रिया के साधन अर्थात करण का ज्ञान कराते हैं।

    जैसे-

    आड़ू, भारी, बंधन, रेती, फांसी, भारी 


    करणवाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ और उदाहरण-

    आ - घेरा, ठेला 

    ऊ - झाड़ू

    ई - मलाई, धुलाई

    औटी - कसौटी 

    न - झाडन, बंधन


    4. भाववाचक कृदंत प्रत्यय

    भाववाचक कृदंत प्रत्यय से बने शब्द, मूल शब्दों को भाववाचक संज्ञा में परिवर्तित कर देते हैं। 

    जैसे- पढाई, लिखावट, सजावट, मिलान, चुनाव आदि। 


    भाववाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ और उदाहरण-

    आन - लगान, चढान, थकान, फरमान,  

    अन - लेखन, पठन, गमन, मनन, मिलन

    ति - गति, पति, अति, रति

    अ - मार, काट, लूट-मार, तोल

    आवा - छलावा, बनावा, दिखावा, बुलावा, 

    आई - उँघाई, सिलाई, कढ़ाई, कटाई, जुताई, लिखाई

    आहट - घबराहट, गड़गड़ाहट, पनपनाहट 


    5. क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय 

    क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय से बने शब्द 'क्रिया' का ज्ञान कराते हैं।

    जैसे- आना, जाना , खाना, पीना, सोना, उठना, बैठना आदि। 

     

    क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ और उदाहरण-

    ता - उठता, बैठता, नाचता, गाता

    या - रोया, धोया, जाया,, आया 

    आ - सुखा, उठा, बैठा, खड़ा,

    ना - खेलना, कूदना, करना, नाचना, धुलना 

    कर - सोकर, पढ़कर, उठकर, गाकर 


    २) तद्धित प्रत्यय - 

    जो प्रत्यय संज्ञा सर्वनाम और विशेषण के अंत में जुड़कर नए शब्द का निर्माण करते हैं तो ऐसे प्रत्यय को तद्धित प्रत्यय कहते हैं।

    उदाहरण - 

    मानव + ता = मानवता 

    मित्र + ता = मित्रता

    मूर्ख + ता = मूर्खता 

    सुंदर + ता = सुंदरता


    तद्धित प्रत्यय लगाने से बने शब्द तद्धितांत कहलाते हैं।

    जैसे -

    देवर + आनी = देवरानी।

    बुद्धिमान + ई = बुद्धिमानी।


    तद्धित प्रत्यय के भेद (प्रकर) 

    1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको कर्ता(कार्य करने वाला) में परिवर्तित कर दे, कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    आर - कुम्हार, सुनार, लुहार, बीमार, गीतकार आदि ।

    दार - समझदार, ईमानदार, दिलदार, कर्जदार आदि ।

    इया - मुखिया, रसोईया, आदि। 


    2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको भाववाचक में परिवर्तित कर दे, भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    आई -महंगाई, भलाई, बुनाई, बोआई, बुराई, कठिनाई आदि।

    पन - बचपन, लडकपन, बड़प्पन आदि ।

    ता - सुन्दरता, मूर्खता, एकता, शालीनता, बन्धुता आदि ।

    त्व - गुरुत्व, प्रभुत्त्व, महत्व आदि ।


    3. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको 'संबंधवाचक' शब्द में परिवर्तित कर दे, संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    इक - शारीरिक, मानसिक,नैतिक, व्याहारिक, धार्मिक, दैनिक, ऐतिहासिक आदि।

    ई - बनारसी, लखनवी, बिहारी, पंजाबी, विलायती, गुजराती, नेपाली, सिंधी आदि।


    4. गणनावाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको 'सख्यावाची' शब्द में परिवर्तित कर दे, गणनावाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    वाँ -  सातवाँ, दसवाँ, ग्यारहवाँ, बारहवाँ आदि।

    हरा - इकहरा, दुहरा, तिहरा आदि ।



    5. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको 'गुणवाचक' शब्द में परिवर्तित कर दे , गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    ईला - चमकीला, रंगीला आदि।

    मान - बुद्धिमान, कीर्तिमान, शक्तिमान, बेईमान आदि। 

    इत - चकित, आनन्दित, क्रोधित आदि।


    6. स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय- 

    ऐसा तद्धित प्रत्यय जो किसी शब्द के साथ जुड़कर उसको 'स्थानवाचक' शब्द में परिवर्तित कर दे या किसी स्थान का बोध कराए, स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे -

    ई - सिंधी, गुजरती, बिहारी, पंजाबी, बंगाली, नेपाली आदि।

    तिया - कलकतिया आदि। 


    Please Share . . .

    Related Links -
    पढ़ें: टॉपर्स नोट्स / स्टडी मटेरियल-

    0 Comments:

    Post a Comment